कॉर्पोरेट जगत को आशा है कि भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से गुजरात के फार्मा सेक्टर के लिए सुनहरे अवसर पैदा होंगे। इस समझौते के तहत भारत से दवाओं का निर्यात बढ़ेगा और देश में कॉन्ट्रैक्ट ड्रग मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को ड्यूटी-फ्री शर्तों के चलते ब्रिटेन की कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने का मौका मिलेगा। यह ऐतिहासिक समझौता भारत की फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूती देगा।
मध्य गुजरात के फार्मा उद्योग ने इस समझौते का स्वागत किया है। वडोदरा फार्मास्युटिकल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत देसाई ने कहा कि ड्यूटी फ्री की व्यवस्था लागू होने से आने वाले समय में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अधिक लाभ की संभावना है। ब्रिटिश कंपनियां भी अब गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए आगे आएंगी। जिससे स्थानीय कंपनियों की वैश्विक पहुंच बढ़ेगी। इससे बल्क ड्रग्स के निर्यात और कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन सेवाओं को भी फायदा पहुंचेगा। एक्टिव फार्मा इंग्रेडिएंट्स (API), बल्क ड्रग्स और फिनिश्ड फॉर्मुलेशन्स के क्षेत्र में परिचालन लागत में भी गिरावट आने की संभावना है। विशेष रूप से वे भारतीय जेनेरिक दवा निर्माता, जो कम लाभ के साथ काम करते हैं, इस नई व्यवस्था से लाभान्वित होंगे।

वर्ष 2024 में भारत से ब्रिटेन को 914 मिलियन डॉलर मूल्य के API और फॉर्मुलेशन्स का निर्यात हुआ था। भारत में गुजरात फार्मा निर्यात में अग्रणी राज्य है। अब FTA के प्रभाव से यह आंकड़ा उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा। दवा अनुसंधान क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी। ग्लोबल क्लिनिकल और कमर्शियल ड्रग डेवेलपमेंट क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ब्रिटेन में दवाओं की खरीद सरकार के अधीन नेशनल हेल्थ सर्विसेज (NHS) के माध्यम से की जाती है। दूसरी ओर, भारत में ब्रिटेन से आने वाले चिकित्सा उपकरणों की मात्रा में भी वृद्धि होने की संभावना है। मध्य और दक्षिण गुजरात की प्रमुख फार्मा कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन को अपने उत्पादों का निर्यात कर रही हैं, और अब इस समझौते से उन्हें और अधिक लाभ होने की उम्मीद है।